सब कर्म अधूरे रह जाएंगे

सब कर्म अधूरे रह जायेंगे,
तनीक समय ना मिल पाएगा।
सूखे तने सा पड़े रहोगे,
जब यम गले लगाए गा।

नाहक व्यथा और वेदना है,
सर्व-जन संवेदना हीन हुए हैं।
क्या ढूँढना दुखी जनों को,
हर धनवान, अब दीन हुए हैं।
व्यर्थ स्वप्न की आश है प्यारे,
यूँ ही आश में रह जाएगा।
सूखे तने सा पड़े रहोगे,
जब यम गले लगाए गा।

हो फैलाए बाँहों को,
सब रिस्ते-नाते भूल गए जो।
यूँ लालच में वशीभूत हो,
अपने-पराए भूल गए जो।
जरा बतलाओ शव पर तेरे,
अश्रु बहाने कौन आएगा।
सूखे तने सा पड़े रहोगे,
जब यम गले लगाए गा।

सोंच जरा तू क्यों आया है,
जब-तक तू है, तेरा साया है।
जाने कितनों से बैर है तेरा,
जाने कितनों को सताया है।
अभी वक्त है संभल जा प्यारे,
वरना इक दिन पछताएगा,
सूखे तने सा पड़े रहोगे,
जब यम गले लगाए गा।

लेखक : लोकेश चन्द्र सिंह

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