उनकी अदाओं का क्या कहना…

उनकी अदाओं का क्या कहना…

बुलाकर पास हाय रूठ जाना उनका।
दबाकर होंठ यूँ ही मुश्कुराना उनका।
बड़ी नज़ाकत से इतराना उनका।
उगलियों से जुल्फें संवारना उनका।

उनकी अदाओं का क्या कहना…

कभी खामोशियों में गुनगुनाना उनका।
कभी उजालों में भी घबराना उनका।
कभी बारिशों में भीग जाना उनका।
कभी आँसुओं से भी नहाना उनका।

उनकी अदाओं का क्या कहना…

कभी निगाहों से छेड़ जाना उनका।
कभी बहानों से क़रीब आना उनका।
कभी हथेलियों पर गुदगुदाना उनका।
कभी नादानियों पर शर्माना उनका।

उनकी अदाओं का क्या कहना…

कभी झरोखों से देख जाना उनका।
हथेलियों से चेहरा छुपना उनका।
हर-रोज नया बहाना उनका।
रूठ जाऊँ तो मनाना उनका

उनकी  अदाओं का क्या कहना…

लोकेश चन्द्र सिंह

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