वो इशारों ही इशारों में छेड़ जाते हैं। न जाने वो एक आँख क्यों दबाते हैं। लग जाते हैं वो निशाने की तरह गुज़र जाते हैं वो ज़माने की तरह मुशकुरतें हैं हँसाने की तरह सताते हैं दीवाने की तरह कई नग्मा मेरे आंसुओं से हो कर गुज़री है। वोRead More →

यह बात मुसाफ़िर क्या जाने। हर-बात मुसाफ़िर क्या जाने। हर-बात मुसाफ़िर क्या जाने। जज्बात मुसाफ़िर क्या जाने। यूँ आते-जाते रहते हैं, यूँ आते-जाते रहते हैं, दिन-रात मुसाफ़िर क्या जाने। यह बात मुसाफ़िर क्या जाने। यह बात मुसाफ़िर क्या जाने। हर-बात मुसाफ़िर क्या जाने। जब कलियाँ चटकी शाख में, एक शोरRead More →

आज फिर आसमां पर तारों को चलते देखा है। धीरे-धीरे, धीरे-धीरे, रात को ढलते देखा है। कभी बादलों के ओट में चाँद को छुपते देखा है। कभी ज़मीं पर, कभी आसमां पर विचरते देखा है। टीम-टीम करते तारों को हर रात में मैंने देखा है। रिम झिम गिरते बूंदों कोRead More →

उनकी अदाओं का क्या कहना… बुलाकर पास हाय रूठ जाना उनका। दबाकर होंठ यूँ ही मुश्कुराना उनका। बड़ी नज़ाकत से इतराना उनका। उगलियों से जुल्फें संवारना उनका। उनकी अदाओं का क्या कहना… कभी खामोशियों में गुनगुनाना उनका। कभी उजालों में भी घबराना उनका। कभी बारिशों में भीग जाना उनका। कभीRead More →

वो नक़ाब में भी यारों क्या क़यामत लगती है। सोचता हूँ गर वो बेनक़ाब हो जाती तो क्या होता। जिन्हें दूर से देख़ कर ही सबकी सांसें थम जाती है। सोचता हूँ गर वो क़रीब आ जाती तो क्या होता। जब ख़याल ही उनका सबकुछ ख़ामोश कर जाती है। सोचताRead More →

हर किसी के जुबां पर बस मेरा ही असर था। वरना मुहब्बत मेरी यूँ सरेआम हो जाते नहीं। ख़ामोश खड़े थे सभी जिन्हें जमाने का डर था। वरना इसकदर छुपकर वो इश्क़ फरमाते नहीं। चल पड़े थे तमाम जिन्हें जाने की जल्दी थी। वरना महफ़िलें यूँ ही वीरान हो जातेRead More →

आज फिर उनमें इक शुरुर सी छा रही है। अरे वो अपनी मैयत खुद ही सजा रही हैं। हर शक्श परेशान है यह मंज़र देख कर। ना जाने क्यों वो ऐसा सितम ढा रही है। क्या बताऊँ की किस कदर मैं जहांन देखता रहा। क्या बताऊँ किन निगाहों से आसमानRead More →

मुझे कश्तियाँ, बगैर साहिल चाहिए। तारीफ़ करूँ तो किसकी, ये बता दे कोई, अरे कोई तो तारीफ के काबिल चाहिए। सफ़र में हैं तो थकान होना लाज़मी है। जो कहीं ख़त्म ना होता हो, किसे ऐसी मंज़िल चाहिए। अब चाँद की खामोशी, खामोशी नहीं है। अब वो भी गुनगुना रहाRead More →

मेरे एक तरफ़ा मुहब्बत की बेकरारी मत पूछो। क्या-क्या छोड़ आया हूँ पीछे यह मत पूछो। वो मेरे ख़्वाबगाह से ज़रा बाहर क्या निकले। ज़माना पीछे पड़ा है कुछ और मत पुछो। कौन कितना गरीब है यह ज़रूरी नहीं। कौन किसके क़रीब है यह मत पूछो। सभी को हसरतें थी उन्हेंRead More →

मेरे  ख़्वाब जो कभी आसमानों मे थे अब ज़मीं पर है। कौन कहता है मै हक़ीक़तों को दरकिनार करता हूँ। बंद लिफाफों पर कलाम उनके अब भी तकिये तर है। लो मै कहता हूँ, हाँ मै आज भी उनसे प्यार करता हूँ। नहीं खौफ़ मुझे जमाने कि ये धौश कहींRead More →