ना बोलो मुझे शराबी, बहुत दुःख होता है। मै शराब को नहीं, अब शराब मुझे पीता है। हर कहीं मैं यूँ ही बदनाम हो गया हूँ यारों। मै नहीं, अब शराब मुझे पी कर जीता है। क्या कहूँ की सूरत-ए-हाल अब दिखया नहीं जाता। अब मुश्कुरा कर भी हाल-ए-दिल छुपायाRead More →

जब सूरज की लालिमा, भोर भए दस्तक देती है। घनी अंधेरी रात भी, इक क्षण में नतमस्तक होती है। जब चंद्र की शीलतीलता पर, चांदनी मोहित होती है। नई नवेली दुल्हन किसी की, बांहो को शोभित होती है। जब काली घनघोर बदरिया, नभ को आगोशित कर लेती है। कहीं थिरकतेRead More →

ना सोचो की मैं मुकर जाऊँगा। दीवाना हूँ कुछ न कुछ तो कर जाऊँगा। जो कह रहा हूँ मैं, कहने दे मुझे। ना कह पाया तो यक़ीनन मर जाऊँगा। तू पास ना आईं तो जमाना क्या करे। पता नहीं अब क्या कर गुज़र जाऊंगा। सफ़र में बस तू ही नहींRead More →

वो ऐसे शूर वीर थे। वो ऐसे शूर वीर थे।। वो ऐसे शूर वीर थे, समक्ष न कोई टिक सका। चले जिधर भी वो उधर, प्रत्यक्ष ना कोई दिख सका। वो ऐसे शूर वीर थे। वो ऐसे शूर वीर थे।। प्रचण्ड ताप, वेग थी, प्रकाण्ड सैन्य, तीर थे। क्या ढाल,Read More →

वो  इस  कदर  मुख़्तसर  हो निकलें थे। क्या  बताऊँ  वो  किधर  को  निकलें थे। अफ़वाह थी की वो शहर को निकलें थे। ऐसा  लगा  मानो  वो धर को निकलें थे। कल तक जो देखकर मुझे मुश्कुराया करते थे। वो   गैर   नहीं   थे   जो   इधर  Read More →

मुझे ज़िन्दगी को कुछ यूँ निभाना पड़ गया। वो  जीते रहे जिन्हें, मैंने दीवाना कर दिया। कुछ यूँ  झुलस गए वो जुगनुओं को छूकर। अब आँसुओं ने भी उन्हें रवाना कर दिया। यह जरूरी नहीं की किसे, कौन देखता  हूँ। जिसे  मैं  देखता हूँ, क्या वो मुझे देखता  है। अगरRead More →

इक   भोर  तूझे  भी चाहिए, इक  भोर  मुझे  भी चाहिए। तूझे  मेरी जरूरत अब नहीं, कोई  और  मुझे भी चाहिए। ये   दौर  तूझे  भी  चाहिए, ये  दौर  मुझे  भी  चाहिए। तुझे   नहीं   तो   ना   सही, इक  ठौर मुझे भी चाहिए। ये  शाम   तुझेRead More →

मैं अंजान मुसाफ़िर, अजनबियों सा दीखता हूँ। हर इकट्ठी भीड़ में भी मैं, कवियों सा दिखता हूँ। हूँ चमन की धूल, पर, मंडियों में बिकता हूँ। हूँ सदियों से स्थूल, पर, गलियों में दिखता हूँ। हूँ बारिस की बूंद, मैं, सागर को सिंचता हूँ। लेकिन ज्ञानहीनो को मैं गागर साRead More →

सब कर्म अधूरे रह जायेंगे, तनीक समय ना मिल पाएगा। सूखे तने सा पड़े रहोगे, जब यम गले लगाए गा। नाहक व्यथा और वेदना है, सर्व-जन संवेदना हीन हुए हैं। क्या ढूँढना दुखी जनों को, हर धनवान, अब दीन हुए हैं। व्यर्थ स्वप्न की आश है प्यारे, यूँ ही आशRead More →

गर कोई दीवाना है तेरा, तो है। गर कोई परवाना है तेरा, तो है। गर साथ पुराना है तेरा, तो है। गर  मुहब्बत वीराना है तेरा, तो है। गर कोई निशाना है तेरा, तो है। गर कोई अफ़साना है तेरा, तो है। गर कोई बेगाना है तेरा, तो है। गरRead More →